आदि पर्व  अध्याय ३

सूत उवाच

स एवमुक्तः प्रत्युवाच |  ७२   क
नानृतमूचतुर्भवन्तौ |  ७२   ख
न त्वहमेतमपूपमुपय़ोक्तुमुत्सहे अनिवेद्य गुरव इति ||  ७२   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति