सभा पर्व  अध्याय ८

नारद उवाच

ईदृशी सा सभा राजन्पितृराज्ञो महात्मनः |  ३८   क
वरुणस्यापि वक्ष्यामि सभां पुष्करमालिनीम् ||  ३८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति