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विराट पर्व
अध्याय ५३
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अर्जुन उवाच
दीर्घवाहुर्महातेजा वलरूपसमन्वितः |  ३   क
सर्वलोकेषु विख्यातो भारद्वाजः प्रतापवान् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति