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द्रोण पर्व
अध्याय १६६
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सञ्जय़ उवाच
यत्तु धर्मप्रवृत्तः सन्केशग्रहणमाप्तवान् |  २३   क
पश्यतां सर्वसैन्यानां तन्मे मर्माणि कृन्तति ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति