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भीष्म पर्व
अध्याय ४८
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सञ्जय़ उवाच
तेषां तु रथसिंहानां मध्यं प्राप्य धनञ्जय़ः |  ३३   क
चिक्रीड धनुषा राजँल्लक्ष्यं कृत्वा महारथान् ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति