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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
जातमात्रेण वीरेण येनोच्चैःश्रवसा इव |  २९   क
हेषता कम्पिता भूमिर्लोकाश्च सकलास्त्रय़ः ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति