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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
सर्वधर्मोपपन्नोऽय़ं मम शिष्यश्च पाण्डवः |  ३४   क
नाय़ं वक्ष्यति मिथ्येति प्रत्ययं कृतवांस्त्वय़ि ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति