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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
पितेव नित्यं सौहार्दात्पितेव स हि धर्मतः |  ४३   क
सोऽल्पकालस्य राज्यस्य कारणान्निहतो गुरुः ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति