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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
अक्षीय़माणो न्यस्तास्त्रस्त्वद्वाक्येनाहवे हतः |  ४६   क
न त्वेनं युध्यमानं वै हन्यादपि शतक्रतुः ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति