विराट पर्व  अध्याय ३६

वैशम्पाय़न उवाच

त्रिगर्तान्मे पिता यातः शून्ये सम्प्रणिधाय़ माम् |  १५   क
सर्वां सेनामुपादाय़ न मे सन्तीह सैनिकाः ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति