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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
तस्याचार्यस्य वृद्धस्य द्रोहो नित्योपकारिणः |  ४७   क
कृतो ह्यनार्यैरस्माभी राज्यार्थे लघुवुद्धिभिः ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति