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द्रोण पर्व
अध्याय १६७
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अर्जुन उवाच
व्राह्मणं वृद्धमाचार्यं न्यस्तशस्त्रं यथा मुनिम् |  ५०   क
घातय़ित्वाद्य राज्यार्थे मृतं श्रेय़ो न जीवितम् ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति