आदि पर्व  अध्याय १६८

गन्धर्व उवाच

स हि तां पूरय़ामास लक्ष्म्या लक्ष्मीवतां वरः |  १८   क
अय़ोध्यां व्योम शीतांशुः शरत्काल इवोदितः ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति