शान्ति पर्व  अध्याय २९७

भीष्म उवाच

स तु स्वभावसम्पन्नस्तच्छ्रुत्वा मुनिभाषितम् |  २५   क
विनिवर्त्य मनः कामाद्धर्मे वुद्धिं चकार ह ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति