शान्ति पर्व  अध्याय १६८

युधिष्ठिर उवाच

धर्माः पितामहेनोक्ता राजधर्माश्रिताः शुभाः |  १   क
धर्ममाश्रमिणां श्रेष्ठं वक्तुमर्हसि पार्थिव ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति