शान्ति पर्व  अध्याय ३१६

नारद उवाच

शुभैर्लभति देवत्वं व्यामिश्रैर्जन्म मानुषम् |  २५   क
अशुभैश्चाप्यधोजन्म कर्मभिर्लभतेऽवशः ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति