menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १६८
chevron_left
chevron_right
व्राह्मण उवाच
यच्च कामसुखं लोके यच्च दिव्यं महत्सुखम् |  ३६   क
तृष्णाक्षय़सुखस्यैते नार्हतः षोडशीं कलाम् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति