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शान्ति पर्व
अध्याय १६८
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व्राह्मण उवाच
यदा संहरते कामान्कूर्मोऽङ्गानीव सर्वशः |  ४०   क
तदात्मज्योतिरात्मा च आत्मन्येव प्रसीदति ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति