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अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
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अङ्गिरा उवाच
भगदैवं तु यो मासमेकभक्तेन यः क्षपेत् |  २१   क
स्त्रीषु वल्लभतां याति वश्याश्चास्य भवन्ति ताः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति