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वन पर्व
अध्याय १६८
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अर्जुन उवाच
चूर्ण्यमानेऽश्मवर्षे तु पावकः समजाय़त |  ३   क
तत्राश्मचूर्णमपतत्पावकप्रकरा इव ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति