उद्योग पर्व  अध्याय १६८

भीष्म उवाच

सेनाविन्दुश्च राजेन्द्र क्रोधहन्ता च नामतः |  १९   क
यः समो वासुदेवेन भीमसेनेन चाभिभूः |  १९   ख
स योत्स्यतीह विक्रम्य समरे तव सैनिकैः ||  १९   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति