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द्रोण पर्व
अध्याय १६८
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सञ्जय़ उवाच
ततः पाञ्चालराजस्य पुत्रः पार्थमथाव्रवीत् |  २१   क
सङ्क्रुद्धमिव नर्दन्तं हिरण्यकशिपुं हरिः ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति