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अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
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अङ्गिरा उवाच
षष्ठे काले तु कौन्तेय़ नरः संवत्सरं क्षपेत् |  ४२   क
अश्वमेधस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति मानवः ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति