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द्रोण पर्व
अध्याय १६८
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सञ्जय़ उवाच
स भवान्क्षत्रिय़गुणैर्युक्तः सर्वैः कुलोद्वहः |  ५   क
अविपश्चिद्यथा वाक्यं व्याहरन्नाद्य शोभसे ||  ५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति