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आदि पर्व
अध्याय १०५
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वैशम्पाय़न उवाच
आगस्कृत्सर्ववीराणां वैरी सर्वमहीभृताम् |  १०   क
गोप्ता मगधराष्ट्रस्य दार्वो राजगृहे हतः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति