शान्ति पर्व  अध्याय १६९

पुत्र उवाच

जातमेवान्तकोऽन्ताय़ जरा चान्वेति देहिनम् |  २२   क
अनुषक्ता द्वय़ेनैते भावाः स्थावरजङ्गमाः ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति