शान्ति पर्व  अध्याय १६९

पुत्र उवाच

मृत्योर्वा गृहमेवैतद्या ग्रामे वसतो रतिः |  २३   क
देवानामेष वै गोष्ठो यदरण्यमिति श्रुतिः ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति