स्त्री पर्व  अध्याय २४

गान्धार्यु उवाच

अय़ं स रशनोत्कर्षी पीनस्तनविमर्दनः |  १७   क
नाभ्यूरुजघनस्पर्शी नीवीविस्रंसनः करः ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति