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आदि पर्व
अध्याय ६१
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वैशम्पाय़न उवाच
जगतो यः स सर्वस्य विद्विष्टः कलिपूरुषः |  ८१   क
यः सर्वां घातय़ामास पृथिवीं पुरुषाधमः |  ८१   ख
येन वैरं समुद्दीप्तं भूतान्तकरणं महत् ||  ८१   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति