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स्त्री पर्व
अध्याय १७
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वैशम्पाय़न उवाच
इत्युक्ते जानती सर्वमहं स्वं व्यसनागमम् |  ६   क
अव्रुवं पुरुषव्याघ्र यतो धर्मस्ततो जय़ः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति