शान्ति पर्व  अध्याय ३२७

व्यास उवाच

स आदिः स मध्यः स चान्तः प्रजानां; स धाता स धेय़ः स कर्ता स कार्यम् |  ८९   क
युगान्ते स सुप्तः सुसङ्क्षिप्य लोका; न्युगादौ प्रवुद्धो जगद्ध्युत्ससर्ज ||  ८९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति