शान्ति पर्व  अध्याय १०५

भीष्म उवाच

इमामवस्थां सम्प्राप्तं दीनमार्तं श्रिय़श्च्युतम् |  १०   क
यदन्यत्सुखमस्तीह तद्व्रह्मन्ननुशाधि माम् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति