अनुशासन पर्व  अध्याय १७

उपमन्युरु उवाच

तण्डिः प्रोवाच शुक्राय़ गौतमाय़ाह भार्गवः |  १६६   क
वैवस्वताय़ मनवे गौतमः प्राह माधव ||  १६६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति