अनुशासन पर्व  अध्याय १७

उपमन्युरु उवाच

नाचिकेताय़ भगवानाह वैवस्वतो यमः |  १६८   क
मार्कण्डेय़ाय़ वार्ष्णेय़ नाचिकेतोऽभ्यभाषत ||  १६८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति