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अनुशासन पर्व
अध्याय १७
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उपमन्युरु उवाच
लोकपालोऽन्तर्हितात्मा प्रसादो हय़गर्दभिः |  ३५   क
पवित्रश्च महांश्चैव निय़मो निय़माश्रय़ः ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति