अनुशासन पर्व  अध्याय १७

उपमन्युरु उवाच

दशवाहुस्त्वनिमिषो नीलकण्ठ उमापतिः |  ४०   क
विश्वरूपः स्वय़ंश्रेष्ठो वलवीरो वलो गणः ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति