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अनुशासन पर्व
अध्याय १७
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उपमन्युरु उवाच
गणकर्ता गणपतिर्दिग्वासाः काम्य एव च |  ४१   क
पवित्रं परमं मन्त्रः सर्वभावकरो हरः ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति