अनुशासन पर्व  अध्याय १७

उपमन्युरु उवाच

शिखी दण्डी जटी ज्वाली मूर्तिजो मूर्धगो वली |  ५६   क
वैणवी पणवी ताली कालः कालकटङ्कटः ||  ५६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति