अनुशासन पर्व  अध्याय १७

उपमन्युरु उवाच

व्रह्मचारी लोकचारी सर्वचारी सुचारवित् |  ७२   क
ईशान ईश्वरः कालो निशाचारी पिनाकधृक् ||  ७२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति