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शान्ति पर्व
अध्याय १६१
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वैशम्पाय़न उवाच
एतत्प्रधानं न तु कामकारो; यथा निय़ुक्तोऽस्मि तथा चरामि |  ४५   क
भूतानि सर्वाणि विधिर्निय़ुङ्क्ते; विधिर्वलीय़ानिति वित्त सर्वे ||  ४५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति