menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १७
chevron_left
chevron_right
सिद्ध उवाच
तेषु मर्मसु भिन्नेषु ततः स समुदीरय़न् |  २५   क
आविश्य हृदय़ं जन्तोः सत्त्वं चाशु रुणद्धि वै |  २५   ख
ततः स चेतनो जन्तुर्नाभिजानाति किञ्चन ||  २५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति