menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १७
chevron_left
chevron_right
काश्यप उवाच
कथं शुभाशुभे चाय़ं कर्मणी स्वकृते नरः |  ४   क
उपभुङ्क्ते क्व वा कर्म विदेहस्योपतिष्ठति ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति