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द्रोण पर्व
अध्याय ६२
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सञ्जय़ उवाच
तत्ते वुद्धिव्यभीचारमुपलप्स्यन्ति पाण्डवाः |  ७   क
पाञ्चाला वृष्णय़ः सर्वे ये चान्येऽपि महाजनाः ||  ७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति