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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १७
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वैशम्पाय़न उवाच
व्युषिताय़ां रजन्यां तु धृतराष्ट्रोऽम्विकासुतः |  १   क
विदुरं प्रेषय़ामास युधिष्ठिरनिवेशनम् ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति