आश्रमवासिक पर्व  अध्याय १७

वैशम्पाय़न उवाच

न तु भीमो दृढक्रोधस्तद्वचो जगृहे तदा |  ७   क
विदुरस्य महातेजा दुर्योधनकृतं स्मरन् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति