आश्रमवासिक पर्व  अध्याय १७

वैशम्पाय़न उवाच

भीम राजा पिता वृद्धो वनवासाय़ दीक्षितः |  ९   क
दातुमिच्छति सर्वेषां सुहृदामौर्ध्वदेहिकम् ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति