सभा पर्व  अध्याय १७

कृष्ण उवाच

प्रतिगृह्य तु तां पूजां पार्थिवाद्भगवानृषिः |  ११   क
उवाच मागधं राजन्प्रहृष्टेनान्तरात्मना ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति