वन पर्व  अध्याय १७

वासुदेव उवाच

स वेगवति कौन्तेय़ साम्वो वेगवतीं गदाम् |  १९   क
चिक्षेप तरसा वीरो व्याविध्य सत्यविक्रमः ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति