वन पर्व  अध्याय १७

वासुदेव उवाच

स विविन्ध्याय़ सक्रोधः समाहूय़ महारथः |  २६   क
चिक्षेप मे सुतो राजन्स गतासुरथापतत् ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति