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विराट पर्व
अध्याय १७
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द्रौपद्यु उवाच
इन्द्रप्रस्थे निवसतः समय़े यस्य पार्थिवाः |  २३   क
आसन्वलिभृतः सर्वे सोऽद्यान्यैर्भृतिमिच्छति ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति