विराट पर्व  अध्याय १७

द्रौपद्यु उवाच

पार्थिवाः पृथिवीपाला यस्यासन्वशवर्तिनः |  २४   क
स वशे विवशो राजा परेषामद्य वर्तते ||  २४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति